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Sabse Bada Din: 21 जून सबसे लंबा दिन क्यों होता है?

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21 जून सबसे लंबा दिन क्यों होता है? साल का Sal ka sabse bada din, परछाई भी छोड़ देती है साथ

World longest day 2023: संक्रांति यानि सोल्सटिस एक खगोलीय घटना है जोकि दो बार, एक गर्मियों में और एक बार सर्दियों में होती है. हर साल सूर्य को जब उत्तर या दक्षिण ध्रुव से देखा जाता है तो साल का सबसे बड़ा दिन 21 June होता है. इस दिन सूर्य की किरण ज्यादा देर तक रहती है

21 June को कुछ पल के लिए परछाई भी साथ छोड़ देती है। यह तब होता है जब सूरज ठीक कर्क रेखा के ऊपर होता है। इस दिन करीब 15 से 16 घंटे तक सूर्य की रोशनी धरती पर पड़ती है।

और 22 दिसम्बर साल का सबसे छोटा दिन होता है, क्योकि इस दिन सूर्य की किरण पृथ्वी पर कम समय के लिए रहती है. ये साल के वो दिन होते हैं, जिसमें दिन और रात की लम्बाई में सर्वाधिक अंतर होता है।

Sabse bada din kab hota hai

यह एक सामान्य घटना है जो हर वर्ष होती है. एक साल में 365 दिन होते हैं, लेकिन एक दिन यानी 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन होता है। इस दिन भारत सहित पूरे उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित सभी देशों में दिन बड़ा और रात छोटी होती है। एक पल ऐसा भी आता है जब परछाई तक गायब हो जाती है। इस दिन को ग्रीष्म अयनांत भी कहते हैं। आइए आपको बताते हैं इस दिन से जुड़ी कुछ खास बातें.

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21 जून सबसे लंबा दिन क्यों होता है?

Sabse bada din kab hota hai: दरअसल, इस दिन सूरज उत्तरी गोलार्द्ध से चलकर भारत के मध्य से गुजरी कर्क रेखा में आ जाता है। इसलिए सूर्य की किरणें ज्यादा समय तक धरती पर पड़ती हैं। यही वजह है कि 21 जून को दिन बड़ा और रात छोटी होती है।

पृथ्वी की यह सामान्य प्रक्रिया है। पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने के साथ अपने अक्ष पर भी घूमती है। वह अपने अक्ष में 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसकी वजह से सूरज की रोशनी धरती पर हमेशा एक जैसी नहीं पड़ती और दिन रात की अवधि में अंतर आता है।

21 जून के दिन दोपहर में सूरज बहुत ऊंचाई पर रहेगा। इसके बाद 21 सितंबर के आसपास दिन व रात की अवधि बराबर हो जाती है। इसके बाद दिन के मुकाबले रात बड़ी होने लगती है। यह प्रक्रिया 23 दिसंबर तक जारी रहती है।

इस दिन की रात साल की सबसे लंबी होती है, जबकि दिन सबसे छोटा होता है।

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समर सोल्सटिस या ग्रीष्मकालीन संक्रांति अर्थात साल का सबसे बड़ा दिन

Sal ka sabse bada din: 21 June सबसे बड़ा दिन, ये आवश्यक नहीं है कि हर साल ये दिन 21 जून को ही पड़े. यह 20 से 22 के बीच किसी भी दिन हो सकता है. जब सूर्य की किरण कर्क रेखा पर लम्बवत पड़ती है,

तो इसके फलस्वरूप उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता है, अर्थात उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की तरफ पूरी तरह से झुका या ये भी कह सकते है कि 23.4 अक्षांश पर झुका हुआ रहता है और तब यहाँ गर्मी का मौसम होता है.

जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में इस समय सूर्य तिरछा चमकता है, जिस वजह से यहाँ रात बड़ी और दिन छोटा होता है और गर्मी कम होने से ठण्ड का मौसम रहता है|

परछाई हो जाएगी गायब?

जी हां, 21 जून को कुछ पल के लिए परछाई भी साथ छोड़ देती है। यह तब होता है जब सूरज ठीक कर्क रेखा के ऊपर होता है। इस दिन करीब 15 से 16 घंटे तक सूर्य की रोशनी धरती पर पड़ती है।

ग्रीष्मकालीन संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व 

पुरे देश में जून सोल्सटिस को धार्मिक रूप से गर्मी छुट्टी और धार्मिक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है. इंग्लैण्ड का स्टोनहेंज, ग्रीष्मकालीन संक्रांति के सांस्कृतिक महत्व को दुनिया के सामने दर्शित करता है.

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यह एक मेगालिथिक संरचना है जो स्पष्ट रूप से जून सोल्सटिस के क्षण को दर्शाती है. ग्रीष्मकालीन संक्रांति के दौरान ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, रूस, भारत और चीन में गर्मी का समय रहता है, क्योकि यह उत्तरी गोलार्द्ध में पड़ता है

दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है उलट

यह चक्र वार्षिक है और दक्षिणी गोलार्द्ध में ठीक इसका उलटा होता है। जहां उत्तरी गोलार्द्ध में रह रहे लोगो के लिए 21 जून को गर्मी की शुरुआत कहा जाता है, वहीं दक्षिणी गोलार्द्ध में रह रहे लोगो के लिए ये सर्दी की शुरुआत मानी जाती है।

सिर्फ 21 जून को ही नहीं होता ऐसा

21 जून को यूं तो सालों से सबसे बड़ा दिन माना जाता है लेकिन हर जगह ऐसा हो यह जरूरी नहीं है। यह 20 जून, 21 जून और 22 जून में से किसी भी दिन हो सकता है, जिसमें 22 जून को दुर्लभ होता है।

पिछली बार साल 1975 में 22 जून को साल का सबसे बड़ा दिन रहा था और अब 2203 में ऐसा होगा। आपको बता दें कि साल का सबसे बड़ा दिन होने की वजह से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है।


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