हेलो फ्रेंड, आज हम योगा सीखेंगे, जानेंगे और कैसे योगासन किया जाता है, इस लेख में दिया गया है। अगर आप योग की बेस्ट आसन के बारे में सीखना चाहते है तो इस लेख को शुरू से लेकर आखरी तक जरूर पढ़े। आपके लिए लेख में योगासन के बारे में मत्वपूर्ण जानकारी दी गयी है।
21 Yoga Aasan : प्राणायाम तथा ध्यान केंद्रित संयुक्त रूप से सिखाता है की नियमित रूप से अभ्यास करने वाले को असंख्य अनगिनित लाभ प्राप्त होते हैं. स्वास्थ में लाभ, रोगप्रतिरोधक क्षमता, मानसिक शक्ति, शारीरिक शक्ति, शरीर की टूट फूट से रक्षा और शरीर का शुद्ध होना जैसे कई लाभ हमें योग से मिलते हैं. आइए जानते हैं 21 Yoga Aasan के बारे में और उन्हें करने के तरीके के बारे में भी.
योग आसन करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ से सलाह व आसन करने की जानकारी अवश्य ले |
अच्छे 21 Yoga Aasan योगाभ्यास के लिए क्या सावधानियों बरतनी चाहियें?
What precautions to take for a good Yoga practice in Hindi?
- ज़्यादातर ऐसा कहा जाता है कि महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान योग का अभ्यास नहीं करना चाहिए। किंतु आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार यह अनुमान लगा सकती हैं कि आपको मासिक धर्म के दौरान योगाभ्यास सूट करता है कि नहीं।
- गर्भावस्था के दौरान योग किसी गुरु की देखरेख में करें तो बेहतर होगा।
- 10 वर्ष की आयू से कम के बच्चों को ज़्यादा मुश्किल आसन ना करायें। किसी गुरु के निर्देशन में ही योग करें।
- ख़ान-पान में संयम बरते। समय से खाएं-पीए।
- धूम्रपान सख्ती से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। अगर आपको तंबाकू या धूम्रपान की आदत है, तो योग अपनायें और यह बुरी आदत छोड़ने की कोशिश करें।
- नींद ज़रूर पूरी लें। शरीर को व्यायाम और पौष्टिक आहार के साथ विश्राम की भी जरूरत होती है। इसलिए समय से सोए
योग के नियम – Rules of 21 Yoga Aasan in Hindi
अगर आप यह कुछ सरल नियमों का पालन करेंगे, तो अवश्य योग अभ्यास का पूरा लाभ पाएँगे:
- किसी गुरु के निर्देशन में योग अभ्यास शुरू करें।
- सूर्योदय या सूर्यास्त के वक़्त योग का सही समय है।
- योग करने से पहले स्नान ज़रूर करें।
- योग खाली पेट करें। योग करने से 2 घंटे पहले कुछ ना खायें।
- आरामदायक सूती कपड़े पहनें।
- तन की तरह मन भी स्वच्छ होना चाहिए – योग करने से पहले सब बुरे ख़याल दिमाग़ से निकाल दें।
- किसी शांत वातावरण और सॉफ जगह में योग अभ्यास करें।
- अपना पूरा ध्यान अपने योग अभ्यास पर ही केंद्रित रखें।
- योग अभ्यास धैर्य और दृढ़ता से करें।
- अपने शरीर के साथ ज़बरदस्ती बिल्कुल ना करें।
- धीरज रखें। योग के लाभ महसूस होने मे वक़्त लगता है।
- निरंतर योग अभ्यास जारी रखें।
- योग करने के 30 मिनिट बाद तक कुछ ना खायें। 1 घंटे तक न नहायें।
- प्राणायाम हमेशा आसन अभ्यास करने के बाद करें।
- अगर कोई मेडिकल तकलीफ़ हो तो पहले डॉक्टर से ज़रूर सलाह करें।
- अगर तकलीफ़ बढ़ने लगे या कोई नई तकलीफ़ हो जाए तो तुरंत योग अभ्यास रोक दें।
- योगाभ्यास के अंत में हमेशा शवासन करें।
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1. रॉकिंग चेयर योग-

रॉकिंग चेयर योग करने से रीढ़ की हड्डियों में ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही शरीर में रक्त का संचार तेज गति होता है.
2. गोमुख आसन-

गोमुख आसन शरीर को सुडौल और सुदृढ़ बनाने वाला योग है. योग की इस मुद्रा को बैठकर किया जाता है.इस मुद्रा में मूल रूप से दानों हाथ, कमर और मेरूदंड का व्यायाम होता है.गोमुख आसन स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभप्रद व्यायाम है.
पलथी लगाकर बैठें. अपने बाएं पैर को मोड़ कर बाएं तलवे को दाएं हिप्स के पीछे लाएं. दाएं पैर को मोड़कर दाएं तलवे को बाएं हिप्स के पीछे लाएं. अपने हथेलियों को पैरों पर रखें. हिप्स को नीचे की ओर हल्का दबाएं और शरीर के ऊपरी भाग को सीधा रखें एवं सिर को सीधा और सतुलित करें. बायीं कोहनी को मोड़ कर हाथों को पीछे की ओर ले जाएं. सांस खींचते हुए दाएं हाथ को ऊपर उठाएं. दायी कोहनी को मोड़ कर दाएं हाथ को पीछे की ओर ले जाएं. दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ें. दोनों हाथों को हल्के से अपनी दिशा में खींचें.
3. सेतु बांध आसन-

सेतु बांध योग मुद्रा से मेरूदंड लचीला होता है साथ ही गर्दन से तनाव भी दूर होता है. पीठ के बल लेट जाएं. घुटनों को मोड़कर तलवों को अच्छी तरह से ज़मीन पर टिकाएं. शरीर के दोनों तरफ बांहों को भूमि से लगाकर रखें. इस अवस्था में हथेलियां जमीन पर टिकी होनी चाहिए. सांस छोड़ते हुए रीढ़ की हड्डियों को खींचे और कमर को ज़मीन की ओर धीरे से दबाएं. गहरी सांस लेते हुए पैरों को जमीन की ओर दबाएं एवं पेडु को जितना हो सके ऊपर की ओर उठाएं. इस मुद्रा में 30 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें. सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं.
4. सुखासन-

सुखासन में दोनों पैरों को एक क्रॉस की मुद्रा में दबाकर रखा जाता है जिसे कमल मुद्रा भी कहते हैं. ध्यान के लिए यह उपयुक्त आसन होता है. समतल जमीन पर आसान बिछाकर पालथी मोड़कर बैठ जाएं. अपने सिर गर्दन और पीठ को सीधा रखें, उन्हें झुकाएं नहीं. कंधों को थोड़ा ढीला छोड़ें. दोनों हाथों को घुटनों पर तथा हथेलियों को ऊपर की और रखें.
सिर को थोड़ा ऊपर उठाएं और आंखें बंद कर लें.अब अपना ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर लगाएं और लम्बी और गहरी सांस लेते रहें. इस आसन को कभी भी एकांत में बैठकर 5-10 मिनट तक कर सकते हैं. अगर आप आध्यात्मिक दृष्टि से यह योग कर रहे हैं तो पूर्व या उत्तर दिशा में इसे करें.
5. त्रिकोण मुद्रा-

त्रिकोण आसन का अभ्यास खड़ा रहकर किया जाता है.यह आसन पार्श्व कोणासन से मिलता जुलता है.इस योग से हिप्स, पैर, टखनों, पैरों और छाती का व्यायाम होता है.यह मु्द्रा कमर के लिए भी लाभप्रद है.इस मुद्रा का अभ्यास किस प्रकार करना चाहिए.इस मुद्रा की अवस्था क्या है एवं इससे क्या लाभ मिलता है आइये इसे देखें.
विश्राम की मुद्रा में
खड़े हो जाएं. दाएं पैर को 3 से 5 फीट फैलाएं. बाएं पैर को 45 डिग्री और दाएं पैर को 90 डिग्री मोड़े. सांस लेते हुए कंधों की ऊँचाई में बांहों को फैलाएं.इस स्थिति में हथेलियों को ज़मीन की दिशा में रखना चाहिए. हिप्स को पीछे ले जाएं और शरीर के ऊपरी भाग को दायीं ओर लाएं. सांस छोड़ते हुए दायी हथेली को दांए पैर के पीछे ले जाएं. बाएं हाथ को छत की दिशा में ऊपर ले जाएं. सिर को बायें हाथ की दिशा में घुमाकर देखें.इस अवस्था में मेरूदंड सीधा और गर्दन रिलैक्स होना चाहिए. इस मुद्रा में 10 से 30 सेकेंड तक बने रहें.
6. ताड़ासन-

सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं. फिर अपने दोनों पैर को आपस में मिलाकर रखें और दोनों हाथों को सीधा कमर से सटाकर रखें. इस वक्त आपका शरीर स्थिर रहना चाहिए. यानी कि आपके दोनों पैरो पर शरीर का वजन सामान होना चाहिए. अब धीरे-धीरे हाथों को कंधों के समानान्तर लाएं. अब दोनों हथेलियों की अंगुलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं. अब सांस भरते हुए अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचिए, जब तक आपको कंधों और छाती में खिंचाव महसूस नहीं होने लगे.
पैरों की एड़ी के सहारे
इसी वक्त पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं और सावधानी से पंजों के बल खड़े हो जाएं. अब फिंगर लॉक लगाकर हाथों के पंजों को ऊपर की ओर मोड़ दें. इस वक्त आपकी गर्दन सीधी होनी चाहिए और हथेलियाँ आसमान की ओर होना चाहिए. ध्यान रखें कि आपकी पैरों की अंगुलियों पर शरीर का संतुलन बना रहे. कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए हाथों को वापस सिर के ऊपर ले आएं. धीरे धीरे एड़ियों को भी भूमि पर टिका दें और दोनों हाथों को भी नीचे लाते हुए कमर से सटाकर पहले वाली स्थिति याने की विश्राम मुद्रा में आ जाएं. इस आसन को नियमित कम से कम 10 बार करें.
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7. उत्कट आसन-

दोनों पैरों को मिलाकर रखिए और सीधे खड़े रहें. पैरों की एड़ियाँ और उंगलियाँ भी मिलाकर रखें. दोनों घुटनों को मोड़ते हुए नीचे बैठिए और एड़ियों को उठा लीजिए ताकि पूरे शरीर का संतुलन दोनों पैरों की उंगलियों पर रहे. दोनों घुटनों को मिलाकर रखिए. रीढ़ को सीधा रखने का प्रयास करें.
दोनों हाथों को बगल में ज़मीन से सटाकर रखें ताकि संतुलन बनाने में सुविधा हो. इसके बाद दोनों कोहनियों को जंघाओं पर रखिए और हाथों की उंगलियों को आपस में मिलाकर ठुड्डी के नीचे रखिए. सांस के प्रति सजग रहें और संतुलन बनाए रखने का प्रयास करें. एक-दो मिनट तक इस स्थिति में रुकें और सामने किसी एक बिंदु पर एकाग्र करें. इसके बाद फिर से खड़े हो जाएं.
8. मार्जर आसन-

अपने घुटनों और हाथों के बल आएं और शरीर को एक मेज कई तरह बना लें. अपनी पीठ से मेज का ऊपरी हिस्सा बनाएं और हाथ और पैर से मेज के चारों पैर बनाएं. अपने हाथ कन्धों के ठीक नीचे, हथेलियां जमीन से चिपकी हुई रखें और घुटनों में पुट्ठों जितना अंतर रखें. गर्दन सीधी नजरें सामने रखें.
सांस लेते हुए अपनी ठोड़ी को ऊपर की ओर सर को पीछे की ओर ले जाएं, अपनी नाभि को जमीन की ओर दबाएं और अपनी कमर के निचे के हिस्से को छत की ओर ले जाएं. दोनों पुटठों को सिकोड़ लें. इस स्थिति को बनाएं रखें ओर लंबी गहरी सांसें लेते और छोड़ते रहें. अब इसकी विपरीत स्थिति करेंगे. सांस छोड़ते हुए ठोड़ी को छाती से लगाएं ओर पीठ को धनुष आकार में जितना उपर हो सके उतना उठाएं, पुट्ठों को ढीला छोड़ दें.
9. कोणासन-

कोणासन करने में जितना आसान है, शरीर के लिए उतना ही लाभकारक भी है. पैरों के बीच में 2 फ़ीट का अंतर रखें. दोनों पैर पर बराबर भार संतुलित करें. श्वास लेते हुए दोनों हाथों को फैलाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और हथेलियों को जोड़ें. अंगलियो को आपस में जोड़ कर गुम्बदनुमा अवस्था में हाथो को रखें. ध्यान रहे कि हाथ कान से छूते हुए जाएं. श्वास बाहर छोड़ते हुए दाहिने ओर झुकें. यह ध्यान दें कि हाथ कोहनियों से मुड़े नहीं. ज़मीन पर पैर से दबाव बनाए रखें. श्रोणि बहिने और रहें. इस स्थिति में बने रहें. शरीर में झुकते हुए खिंचाव बनाए रहें. इस स्थिति में रहते हुए गहरी श्वास लें और छोड़ें. श्वास लेते हुए पुनः सामान्य स्थिति में खड़े हों. श्वास छोडते हुए दोनों हाथ नीचे लाएं. बाएं ओर यही प्रक्रिया दोहराएं.
10. भुजंग आसन-

सबसे पहले अपने पेट के बल से लेट जाएं. अब अपने हथेलियों को अपने कंधे की सीध में ले कर आएं. इस दौरान अपने दोनों पांवों के बीच की दूरी को कम करें साथ ही पांव को सीधा तथा तना हुआ रखें. अब सांस भरते हुए बॉडी के अगले हिस्से को नाभि तक उठाएं.
इस दौरान ध्यान रखें कि
अपनी कमर के ऊपर ज्यादा स्ट्रेच न आ पाए. अपनी क्षमता अनुसार अपनी इस अवस्था को बना कर रखें. योग का अभ्यास करते समय धीमे धीमे सांस भरें और फिर छोड़ें. शुरुआती मुद्रा में वापस आते समय एक गहरी सांस को छोड़ते हुए वापसी करें. इस तरह इस आसन का एक पूरा चक्र खत्म हुआ. इसे आप अपनी क्षमता अनुसार दोहराएं.
11. प्रणाम आसन-

नमस्कार आसन किसी भी आसन की शुरुआत में किया जाता है. ये काफी सरल है.
12. नटराज आसन-

भगवान शिव के नाम पर इस आसन का नाम रखा गया है. शुरुआत में इसे करने में थोड़ा कठिनाई आ सकती है परंतु इसके नियमित अभ्यास से इसे आसानी से किया जा सकता है.
सबसे पहले
आराम की मुद्रा में खड़े हो जाएं. शरीर का भार बाएं पैर पर स्थापित करें और दाएं घुटने को धीरे धीरे मोड़ें और पैर को जमीन से ऊपर उठाएं. दाएं पैर को मोड़कर अपने पीछे ले जाएं. दाएं हाथ से दाएं टखने को पकड़ें. बाएं बांह को कंधे की ऊँचाई में उठाएं. सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को ज़मीन पर दबाएं और आगे की ओर झुकें. दाएं पैर को शरीर से दूर ले जाएं. सिर और गर्दन को मेरूदंड की सीध में रखें. इस मुद्रा में 15 से 30 सेकेण्ड तक बने रहें.
13. शवासन-

इसे करते समय आपको रिलैक्स महसूस करना है. अब अपनी पीठ के सहारे लेट जाएं और ध्यान रखे की इस अवस्था में आपके पैर ज़मीन पर बिल्कुल सीधे होने चाहिए. अपने दोनों हाथों को शरीर से कम से कम 5 इंच की दूरी पर रखें. हाथों को इस तरह रखे कि दोनों हाथ की हथेलियां आसमान की दिशा में हो.
अब शरीर के हर अंग को आपको ढीला छोड़ना है, और आँखों को भी बंद करना है. हल्की-हल्की साँसे लें. इस वक्त आपका पूरा ध्यान श्वांसों पर होना चाहिए. मन में दूसरे किसी भी विचार को आने ना दें. इस आसान को करते वक्त यदि आपको कमर या रीढ़ में किसी प्रकार की परेशानी महसूस होती है तो घुटने के नीचे कम्बल या तकिया रख सकते हैं.
14. हलासन-

हलासन हलासन में शरीर को हल की मुद्रा में रखा जाता है.इस आसन के लिए शरीर का लचीला होना बहुत आवश्यक होता है. फर्श पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को भी बिल्कुल आराम की मुद्रा में जमीन पर सीधे रखें. लंबी सांस लेते हुए पेट की मांसपेशियों के सहारे अपने पैरों को फर्श से ऊपर उठाएं और दोनों पैरों को 90 अंश के कोण पर खड़े रखें. सामान्य रूप से लगातार सांस लेते हुए अपने कूल्हों और पीठ को हाथ की सहायता से फर्श से ऊपर उठाएं.
अब अपने पैरों को
सिर के ऊपर से ले जाते हुए 180 डिग्री के कोण पर मोड़े जब तक कि आपके पैरों की उंगलियां फर्श से नहीं छू जाती हैं. आपकी पीठ फर्श पर लंबवत होनी चाहिए. इस मुद्रा में होने में शुरू में आपको मुश्किल जरूर होगी लेकिन थोड़े प्रयत्न के बाद आप इसे आसानी से कर सकते हैं. इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे और आराम से करें. लेकिन साथ में यह भी ध्यान रखें कि आपको अपने गर्दन पर दबाव नहीं डालना है ना ही इससे जमीन की ओर धक्का देना है. अब सामान्य अवस्था में आ जाएं और शरीर को थोड़ी देर आराम दें. सांस लेते रहें और रिलैक्स महसूस करें.
15. बाल आसन-

बाल आसन से तनाव दूर होता है। शरीर को संतुलिच और रक्त संचार को सामान्य बनाने के लिए इस आसन को किया जाता है।
बाल का अर्थ है- शिशु या बच्चा, बालासन में हम एक शिशु की तरह वज्र आसन लेकर हाथों और शरीर को आगे की ओर झुकाते है. यह आसन बेहद आसान ज़रूर है मगर काफी लाभदायक भी है. कमर की मांसपेशियों को आराम देता है और ये आसन कब्ज़ को भी दूर करता है. मन को शांत करने वाला ये आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है.
बालासन (शिशुआसन) करने की प्रक्रिया-
अपनी एड़ियों पर बैठ जाएं, एड़ी पर कूल्हों को रखें, आगे की ओर झुके और माथे को जमीन पर लगाएं. हाथों को शरीर के दोनों ओर से आगे की ओर बढ़ाते हुए जमीन पर रखें, हथेली आकाश की ओर (अगर ये आरामदायक ना हो तो आप एक हथेली के ऊपर दूसरी हथेली को रखकर माथे को आराम से रखें.). धीरे से छाती से जाँघो पर दबाव दें. स्थिति को बनाये रखें. धीरे से उठकर एड़ी पर बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी को धीरे धीरे सीधा करें. विश्राम करें.
16. अर्ध चन्द्रासन-

इस आसन को करते समय शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र जैसी हो जाती है इसलिए इसे अर्धचन्द्रासन कहते है. अर्ध का अर्थ होता है आधा और चंद्रासन अर्थात चंद्र के समान किया गया आसन.
इस आसन को खड़े होकर किया जाता है. अर्धचन्द्रासन को अंग्रेजी में Half Moon Pose भी कहते है. यह आसन सामान्य स्ट्रेचिंग और बैलेंसिंग पोज़ है जो खासकर कमर के निचले हिस्से, पेट और सीने के लिए लाभदायक है. इस आसन को करने से तनाव दूर हो जाता है.

अर्धचंद्रासन का सही तरीका-

इसे करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों की एड़ी-पंजों को मिलाकर खड़े हो जाएं. दोनों हाथ कमर से सटे होने चाहिए और अपनी गर्दन सीधी रखें. फिर धीरे धीरे दोनों पैरों को एक दूसरे से करीब एक से डेढ़ फ़ीट की दूरी पर रखें. ध्यान रहे कि इस आसन का अभ्यास करते वक्त आपका मेरुदंड सीधा रहे.
इसके उपरांत
दाएं हाथ को उपर उठाएं और कंधे के समानांतर लाएं. आपकी हथेली का रुख आसमान की ओर होना चाहिए. इसे करते समय ध्यान रहे कि आपका बायां हाथ आपकी कमर पर ही रहे. अब बाई ओर झुके, इस दौरान आपका बायां हाथ स्वयं ही नीचे खिसकता जायेगा. याद रहे कि बाएं हाथ की हथेली को बाएं पैर से अलग न हटने पाए. इसी स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहे, फिर धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आएं. अगर इसे पहली बार कर रहे है तो जितना हो सके उतना ही झुकें. यही प्रक्रिया दूसरी तरफ भी करें.
17. दंडासन-

दंडासन करने के लिए सबसे पहले किसी साफ-स्वच्छ स्थान पर कंबल आदि बिछा लें. अब सीधा तन कर बैठ जाइये और दोनों पैरों को चहरे के समानान्तर एक दूसरे से सटाकर सीधा रखें. सिर को बिलकुल सीधा रखें. अपने पैरों की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़ें और तलवों को बाहर की ओर धक्का दें.
18. अधोमुखी श्वान आसन-

अधोमुख स्वान आसन एक कुत्ते (श्वान / स्वान) की तरह सामने की ओर झुकने का प्रतीकात्मक है इसलिए इसे अधोमुख स्वान आसन कहते हैं.
अपने हाथों और पैरों के बल आ जाएं. शरीर को एक मेज़ की स्थिति में ले आएं. आपकी पीठ मेज़ की ऊपरी हिस्से की तरह हो और दोनों हाथ और पैर मेज़ के पैर की तरह. सांस छोड़ते हुए कमर को ऊपर उठाएं. अपने घुटने और कोहनी को मजबूती देते हुए सीधे करते हुए) अपने शरीर से उल्टा v आकार बनाएं. हाथ कंधो के जितने दूरी पर हों.
पैर कमर के दूरी के बराबर और
एक दूसरे के समानांतर हों. पैर की उंगलिया बिल्कुल सामने की तरफ हों. अपनी हथेलियों को जमीन पर दबाएं, कंधों के सहारे इसे मजबूती प्रदान करें. गले को तना हुआ रखते हुए कानों को बाहों से स्पर्श कराएं. लम्बी गहरी श्वास लें,अधोमुख स्वान की अवस्था में बने रहें. अपनी नज़रें नाभि पर बनाए रखें. श्वास छोड़ते हुए घुटने को मोड़े और वापस मेज़ वाली स्थिति में आ जाएं. विश्राम करें.
19. वृक्षासन-

वृक्षासन का अर्थ है वृक्ष के समान मुद्रा. इस आसन को खड़े होकर किया जाता है. नटराज आसन के समान यह आसन भी शारीरिक संतुलन के लिए बहुत ही लाभप्रद है
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वृक्षासन करने के लिए
सीधा तनकर खड़े हो जाइए. शरीर का भार बाएं पैर पर डालिए और दांए पैर को मोड़िए. दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइए. दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में छाती के पास लाइए. अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइए. बाएं पैर के तलवे को ज़मीन की ओर दबाइए. सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइए. सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिए. इस मुद्रा में 15 से 30 सेकेण्ड तक बने रहिए. दोनों तरफ इस मुद्रा को 2 से 5 बार दुहराइये.
20. उष्टासन-

“उष्ट्र” एक संस्कृत भाषा का शब्द है और इसका अर्थ ऊंट होता है. उष्ट्रासन को अंग्रेजी में “Camel Pose” कहा जाता है। उष्ट्रासन एक मध्यवर्ती पीछे झुकने-योग आसन है जो अनाहत (ह्रदय चक्र) को खोलता है. इस आसन से शरीर में लचीलापन आता है, शरीर को ताकत मिलती है तथा पाचन शक्ति बढ़ जाती है.
मैट पर घुटने के
सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें. घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आकाश की तरफ हो. सांस लेते हुए मेरुदंड को पुरोनितम्ब की ओर खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है. गर्दन पर बिना दबाव डालें तटस्थ बैठे रहें. इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहें. सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं. हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं.
21. वज्रासन-

इस आसन के अभ्यास से शरीर मजबूत बनता है। यह एक साधनात्मक मुद्रा हैं। यह एक मात्र ऐसा आसन है जिसे खाने के बाद भी कर सकते है। इस आसन को दिन या शाम दोनों वक्त कर सकते हैं. वज्रासन करने के लिए किसी साफ़ समतल जगह पर दरी बिछाएं.
फिर इस पर घुटनों के बल
बैठे तथा पंजों को पीछे फैलाकर एक पैर के अंगूठे को दूसरे अंगूठे पर रख दें. इस मुद्रा में आपके घुटने पास-पास किन्तु एड़ियां अलग-अलग होनी चाहिए. आपका नितम्ब दोनों पंजो के बिच में होना चाहिए और एड़ियां कूल्हों की तरफ. अब अपनी हथेलियों को घुटनो पर रखें. आप अपनी क्षमता के अनुसार वज्रासन का अभ्यास कीजिए. बाद में वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं. वज्रासन करने के लिए भोजन के बाद पहले 5 मिनट का समय लें, फिर इसे करें.