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इकोनॉमिक सर्वे क्या है? क्यों ये हमारे लिए जरूरी है? जानें इसके बारे

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सर्वेक्षण पिछले एक साल के दौरान देश के आर्थिक प्रदर्शन की एक विस्तृत रिपोर्ट है। यह मूल रूप से 12 महीने की अवधि में अर्थव्यवस्था की प्रगति का आकलन है।

सबसे पहले बात, ये इकोनॉमिक सर्वे चीज क्या है?

हम उस देश में रहते हैं, जहां मिडिल क्लास लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है। हमारे यहां ज्यादातर घरों में एक डायरी बनाई जाती है। इस डायरी में पूरा हिसाब-किताब रखते हैं। साल खत्म होने के बाद जब हम देखते हैं तो पता चलता है कि हमारा घर कैसा चला? हमने कहां खर्च किया? कितना कमाया? कितना बचाया? इसके आधार पर फिर हम तय करते हैं कि हमें आने वाले साल में किस तरह खर्च करना है? बचत कितनी करनी है? हमारी हालत कैसी रहेगी?

ठीक हमारे घर की डायरी की तरह ही होता है इकोनॉमिक सर्वे। इससे पता चलता है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है? इकोनॉमिक सर्वे में बीते साल का हिसाब-किताब और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान का जिक्र रहता है। इकोनॉमिक सर्वे को बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है।

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इकोनॉमिक सर्वे कौन तैयार करता है?

वित्त मंत्रालय के अंडर एक डिपार्टमेंट है इकोनॉमिक अफेयर्स। इसके अंडर एक इकोनॉमिक डिवीजन है। यही इकोनॉमिक डिवीजन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर यानी CEA की देख-रेख में इकोनॉमिक सर्वे तैयार करती है।

इस वक्त CEA डॉक्टर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम हैं। पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था। 1964 तक इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था। लेकिन, बाद में इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा।

इकोनॉमिक सर्वे क्यों जरूरी होता है?

ये कई मायनों में जरूरी होता है। इकोनॉमिक सर्वे एक तरह से हमारी अर्थव्यवस्था के लिए डायरेक्शन की तरह काम करता है। क्योंकि इसी से पता चलता है कि हमारी अर्थव्यवस्था कैसी चल रही है और इसमें सुधार के लिए हमें क्या करने की जरूरत है?

इकोनॉमिक सर्वे से ही अर्थव्यवस्था का ट्रेंड पता चलता है। इसी के आधार पर सरकार को सुझाव दिए जाते हैं। जैसे-पिछले साल के इकोनॉमिक सर्वे में सुझाव दिया गया था कि अगर भारत को 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, तो इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की जरूरत है।

प्र्श्न उत्तर  Economictime से

एक सामान्य अभ्यास के रूप में, केंद्रीय बजट और भारत के आर्थिक सर्वेक्षण को एक दिन अलग किया जाता है। हालाँकि बजट सर्वेक्षण के निष्कर्षों को एक पृष्ठभूमि के रूप में रखता है, लेकिन वे आवश्यक रूप से एक दूसरे को प्रभावित नहीं करते हैं।

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आर्थिक सर्वेक्षण क्या है?

एक आर्थिक सर्वेक्षण प्रमुख आर्थिक विकास का एक स्नैपशॉट है जो पिछले एक साल में हुआ है और यह दर्शाता है कि लघु से मध्यम अवधि में आगे क्या आना है। यह अनिवार्य रूप से बजट की प्रस्तुति के लिए आधार तैयार करता है।

  1. सर्वेक्षण कौन तैयार करता है?
    वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार की अध्यक्षता वाली टीम द्वारा सर्वेक्षण तैयार किया जाता है। कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन , जिन्हें दिसंबर 2018 में मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया था, सर्वेक्षण पेश करेंगे।
  2. इस बार क्या अलग होगा?
    सर्वेक्षण को ऐसे समय में प्रस्तुत किया जाएगा, जब अर्थव्यवस्था सरकार द्वारा लगाए गए पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार 7.7 प्रतिशत तक अनुबंधित होने की संभावना है। सर्वेक्षण संभवतः वर्तमान आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखेगा और कोई भी उपाय सुझाएगा जो भारत को $ 5 ट्रिलियन के लक्ष्य तक ले जाएगा।
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क्या सरकार के लिए इसे पेश करना जरूरी है?

ऐसा जरूरी तो नहीं है। सरकार इकोनॉमिक सर्वे को पेश करने और इसमें दिए गए सुझावों या सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। अगर सरकार चाहे तो इसमें दिए गए सारे सुझावों को खारिज कर सकती है। फिर भी इसकी अहमियत है क्योंकि इससे बीते साल की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा पता चलता है।

दो वॉल्यूम में आता है इकोनॉमिक सर्वे

पहले इकोनॉमिक सर्वे एक ही वॉल्यूम में पेश किया जाता था। लेकिन, 2014-15 से इसे दो वॉल्यूम में पेश किया जाने लगा। आमतौर पर पहले वॉल्यूम में अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर फोकस रहता है और दूसरे वॉल्यूम में अर्थव्यवस्था के सभी खास सेक्टर्स का रिव्यू होता है। इसके अलावा स्टेटिस्टिकल अपेंडिक्स भी आता है, जिसमें कई तरह के आंकड़े होते हैं।


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