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लम्पी वायरस क्या है? कैसे फैलता है, इसका इलाज

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पशुओं को बचाने ke उपाए | Lampi vairus kya hai | यह Kese felta hai | Lampi vairus केसे बना | टीकाकरण, अभी तक भारत मे स्थिति

Lampi virus: कोरोना वायरस की तरह एक खतरनाक बीमारी है। जो पशुओं मै होने वाली महामारी है। कोरोना से जूझने के बाद ही मानव स्थिति किसी तरह से सामान्य होनी शुरू हुई थी कि अब बेजुबान जानवरों पर वायरस लम्पी वायरस का कहर टूट पड़ा है। देश के कुछ राज्यों खासकर राजस्थान और गुजरात समेत अलग अलग राज्यों में इस जानलेवा वायरस का संक्रमण हो चूका है। भारत देश के अतिरिक्त अन्य देशों में भी इस बीमारी (lampi virus) का असर हुआ इसके चलते अभी तक बड़ी संख्या में दुधारू पशुओं की जान जा चुकी है। ये भी कोरोना की तरह एक लाइलाज बीमारी है जिसका अभी तक कोई भी एंटीडोट नहीं तैयार किया जा सका है।

Lumpy Virus क्या है?

लम्पी त्वचा रोग (Lumpy skin disease virus) एक वायरल बीमारी है जो मवेशियों में लंबे समय तक रुग्णता का कारण बनती है। ये रोग पॉक्स वायरस – लम्पी स्किन डिजीज वायरस (Pox Lumpy skin disease virus)एलएसडीवी के कारण होता है। यह पूरे शरीर में दो से पांच सेंटीमीटर की गांठों के रूप में प्रकट होता है। विशेष रूप से सिर, गर्दन विभिन्‍न अंगों, थन (मवेशियों की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास गांठे धीरे-धीरे बड़े और गहरे घावों की तरह खुल जाती हैं।

पहली बार यह वायरस वर्ष 2019 में भारत में इस वायरस की दस्तक हुई थी, यह एक प्रकार से त्वचा का एक रोग है, जिसमें त्वचा में गांठदार या ढेलेदार दाने बन जाते हैं. इसे एलएसडीवी कहते हैं. यह एक जानवर से दूसरे में फैलता है। यह कैप्रीपॉक्स वायरस के कारण ही फैलता है। जानकारी कहती है कि यह बीमारी मच्छर के काटने से जानवरों में फैलती है।

लम्पी वाइरस के प्रमुख लक्षण

  • आमतौर पर हल्के से लेकर गंभीर रूप तक होते हैं।
  • 41 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तेज बुखार पहला लक्षण है।
  • पशु सुस्त, उदास हो जाता है एवं चारा खाने से इंकार कर देता है और कमजोर हो जाता है।
  • छाती क्षेत्र और कोहनी क्षेत्र के पास सूजन के परिणामस्वरूप लंगड़ापन होता है।
  • लवचा के नीचे आकार में 2.5 सेमी दृढ़ स्पष्ट गोल पिंड पूरे शरीर में विकसित होते हैं। (विशेष रूप से सिर, गर्दन, विभिन्‍न अंगों शरीर के उदर भागों और थन के आसपास)
  • 7 से 15 दिनों के भीतर नोड्यूल्स टूटने लगते हैं और खून बहने लगता है और इसके परिणामस्वरूप माइयासिस हो सकता है।
  • इस घाव से संक्रमित जानवरों में सांस लेने में कठिनाई देखी जाती है।
  • जब ये गांठें ठीक हो जाती हैं तो ये जानवरों के शरीर पर एक स्थायी निशानी छोड़ जाती हैं।
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गायों में लम्पी वाइरस

लम्पी वायरस (lampi virus) गायों मै होने वाला एक संक्रमण है जो अन्य जानवरों के लिए भी जानलेवा बीमारी है। ये बीमारी दुधारू पशुओं में पाई जा रही है , मुख्य रूप से यह संक्रमण गायों में अधिकतर देखने को मिल रहा है। इस संक्रमण से संक्रमित होने वाली गायों की अधिकतर मौत हो चुकी हैं। और यह वायरस दूसरे पशुओं को भी जल्दी से संक्रमित करता है यदि एक संक्रमित गाय अन्य स्वस्थ गायों के संपर्क मै आती हैं तो यह वायरस अन्य गायों को भी संक्रमित कर देता है। साथ ही उनकी मृत्यु भी हो सकती है Lumpy virus का भी कोरना की तरह कोई पुख्ता इलाज अभी तक नहीं आया है। इसका इलाज सिर्फ गायों मै लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। Lumpy virus को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने एक अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है।

बीमारी का नामलम्पी वाइरस
वाइरस का नामकैप्रीपॉक्स वायरस
रोगपशुओ में स्किन रोग
भारत में कब फैला2019
किस राज्य में ज्यादा फैलाराजस्थान, मध्यप्रदेश
बचावटीकाकरण एवं ओषधि
लक्षणत्वचा में गांठदार या ढेलेदार दाने

कैसे फैलता है लम्पी वायरस (lampi virus)?

यह वायरस एक संक्रमित पशु से अन्य स्वस्थ पशुओं मै जाता है ।जिससे अन्य पशुओं मै भी यह लक्षण उत्पन या दिखाई देने लगते हैं।लम्पी वायरस एक संक्रमित रोग है। जानकारी के लिए बता दें कि संक्रमण फैलने का मुख्य कारण मच्छरों, मक्खियों, तत्तैयो, जूं आदि से फैल सकता है। इसके अलावा पशुओं के सीधे संपर्क में आने से भी फ़ैल सकती है। यदी एक स्वस्थ पशु लंपी वायरस से पीड़ित पशु के साथ मै अपना भोजन ग्रहण करते है। तो भी यह वायरस फैल सकता है क्योंकि साथ खाने से लार मै उपस्थित वायरस खाने मै मिल जाता है जब कोई स्वस्थ पशु उस भोजन को खा लेता है। तो वायरस उनके शरीर मै जाकर ये सारे लक्षण उत्पन kr देता है। पानी के सेवन करने से भी ये बीमारी फ़ैल सकती है। Lumpy Virus एक बहुत ही तेजी से फैलने वाला वायरस है। वर्तमान में यह वायरस देश के 15 से भी अधिक राज्यों में फैल गया हैं। इस बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए समय पर लक्षणों की पहचान कर उनके आधार पर इलाज शुरू कर देना ही एकमात्र तरीका है।

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लम्पी वाइरस का संचरण

एलएसडीवी का प्रकोप उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता से होता है। यह संक्रमण पर गीली गर्मी और शरद ऋतु के महीनों के दौरान अधिक होती है। विशेष रूप से यह पानी के नजदीकी इलाकों में, हालांकि, शुष्क मौसम के दौरान भी प्रकोप हो सकता है। रक्त-चूसने वाले कीट जैसे मच्छर और मक्खियाँ रोग फैलाने के लिए यांत्रिक वाहक के रूप में कार्य करते हैं। एक एकल प्रजाति वेक्टर की पहचान नहीं की गई है। इसके बजाय, वायरस को स्टोमोक्सी, बायोमिया फासिआटा, ताबानिडे, ग्लोसिना, और कुलिकोइड्स प्रजातियों से अलग कर दिया गया है। एलएसडीवी के संचरण में कीटों की विशेष भूमिका है। गांठदार त्वचा रोग के प्रकोप छिटपुट होते हैं क्योंकि वे जानवरों की गतिविधियों, प्रतिरक्षा स्थिति और हवा और वर्षा के पैटर्न पर निर्भर होते हैं, जो वेक्टर आबादी को प्रभावित करते हैं।

वायरस को रक्त, नाक से स्राव, लैक्रिमल स्राव, वीर्य और लार के माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है। यह रोग यदि संक्रमित दूध को दूध पिलाने वाले बछड़ों में भी फैल सकता है। प्रायोगिक रूप से संक्रमित मवेशियों में, एलएसडीवी बुखार के 11 दिन बाद लार में, 22 दिनों के बाद वीर्य में और 33 दिनों के बाद त्वचा के नोड्यूल्स में पाया गया। मूत्र या मल में वायरस नहीं पाया जाता है। अन्य चेचक विषाणुओं की तरह, जिन्हें अत्यधिक प्रतिरोधी माना जाता है, एलएसडीवी संक्रमित ऊतकों में 120 दिनों से अधिक समय तक व्यवहार्य रह सकता है।

लम्पी वायरस के लक्षण

Lumpy Virus से संक्रमित पशुओं में ये लक्षण (Lumpy Virus Symptoms) देखने को मिल रहे हैं –

  • संक्रमित पशुओं को संक्रमण के बाद हाई temptur रहता है।
  • धुदारू पशुओ मै दूध देने की मात्रा में बहुत कमी आती है।
  • पशुओं की त्वचा पर चकत्ते और गांठे बन जाती हैं।
  • भूख कम लगना।
  • पशु के पैरों में सूजन और लंगड़ापन आना।
  • नर पशु में कार्य करने की क्षमता कम होना।
  • पशुओं के वजन में कमी आती है।
  • लार बहना और आँख नाक से पानी आना भी इसके मुख्य लक्षणों में से एक है
  • शरीर दिन पर दिन खराब होना है

लम्पी स्किन रोग उपचार देसी

निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग संक्रमण से बचाव के लिए किया जा सकता है :-

घटकमात्रा
तुलसी के पते1 मुट्ठी
दाल चीनी5 ग्राम
सोंठ पाउडर5 ग्राम
काली मिर्च10 नग
गुड़आवश्यक मात्रा

उपरोक्त सामग्री एक खुराक की मात्रा है। खुराक को सुबह शाम लड्डू बनाकर खिलाए।

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लम्पी वायरस से बचाव

लम्पी वायरस से अपने पशुओं के बचाव (Lumpy Virus Treatment) का तरीका।

यदि कोई पशु संक्रमित हो जाता है। तो उसे अन्य पशूओ से अलग कर देना चाहिए। समय समय पर उनके रहने के स्थान पर कीटनाशक व अन्य। निरोधक का छिड़काव करना चाइए समय समय पर साफ सफ़ाई करते रहना चाइए मक्खी मच्छर व अन्य गन्दगी को हटाने के लिए समय पर सफाई करनी चाइए। व कीटनास्को का छिड़काव करना यदि किसी संक्रमित पशु की मृत्यु हो जाती है तो उसके शव को खुले मै नही छोड़ना चाहिए। शव को जमीन में गाड़ देना चाहिए शव को जलाना चाहिए पशुओं के खाने मै प्रोटीन व फाइबर की मात्रा बड़ाना चाइये चिकित्सक की सलाह पर मल्टीविटामिन देना चाइए जिससे उनका इम्यूनिटी बड़ सके सारे पशुओं को वैक्सीन देनी होगी।

अभी तक भारत मे स्थिति

Lumpy Skin Disease: भारत देश मै लम्फी से बचाव के लिए सारे राज्यो मै टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है । साथ ही उत्तरप्रदेश मै 31अक्टूबर का लक्ष्य रखा गया हे जिसमे सारे दुधारू पशुओं का टीकाकरण हो जाए साथ ही मध्‍य प्रदेश में पशुओं को लंपी रोग से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन को बनाया केंद्र बिंदु। भैंस वंशीय पशु में लंपी चर्म रोग के लक्षण नहीं पशुओं को लंपी रोग से सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 14 लाख गोट पाक्स provide कर दी गई हैं।

पशुपालन विभाग ने इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन को केंद्रबिंदु मानकर टीकाकरण भी शुरू कर दिया है। 33 लाख (80 प्रतिशत ) पशुओं को टीका लगाया जा चुका इसके लिए पशु चिकित्सकों को वर्चुअल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि टीकाकरण में देरी न हो। वहीं पशुपालन संचालनालय से साफ कर दिया है कि अभी तक भैंस वंशीय पशुओं पर इस रोग के लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 35 लाख से अधिक गोवंशी पशु हैं और 14 लाख टीके मिलने के बाद इतने ही की और जरूरत है, जो बाद में मिलेंगे।

मैदानी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित गांव और उसके चारों तरफ प्राथमिकता से टीकाकरण कराएं। वहीं केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए निगरानी भी करें। तैयारी के अनुसार इंदौर केंद्र बिंदु में पांच लाख 34 हजार 762, भोपाल में तीन लाख 45 हजार 690, ग्वालियर में दो लाख 87 हजार 68 और उज्जैन केंद्र बिंदु में शामिल जिलों को दो लाख 32 हजार 480 टीके पहुंचा दिए गए हैं। ज्ञात हो कि प्रदेश में लगातार टीकाकरण चल रहा है


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