Home » News feed » विदेश » जलवायु परिवर्तन से प्रभावित शीर्ष 10 देशो में अब भारत भी

जलवायु परिवर्तन से प्रभावित शीर्ष 10 देशो में अब भारत भी

Join WhatsApp Channel Join Now
Join Telegram Channel Join Now

बॉन जर्मनी : क्लाइमेट चेंज से प्रभावित दुनिया  शीर्ष 10 देशो में अब भारत भी शामिल हो चूका है। पर्यावरण थिंक टैंक जर्मनवॉच (Eco think tank German Watch) ने ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स-2021 में यह दावा किया है। इस सूचि में भारत सातवे नंबर पर है और मोजाम्बिक शीर्ष पर है। जिम्बाब्वे, जापान और मलावी भारत से ऊपर है।  इस रिपोर्ट के अनुसार 2000-2019 के दौरान मौसम से जुडी घटनाओ में 4.8 लाख मोते हो चुकी है।

ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2021 मौसम से संबंधित हानि की घटनाओं (तूफान, बाढ़, गर्मी की लहरें आदि) के प्रभाव से किस हद तक देशों और क्षेत्रों को प्रभावित किया गया है, इसका विश्लेषण करता है। मानव प्रभावों (घातक) और प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान का विश्लेषण किया गया। उपलब्ध सबसे हालिया डेटा – 2019 के लिए और 2000 से 2019 तक – को ध्यान में रखा गया

2019 में सबसे अधिक प्रभावित देश और क्षेत्र मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे और बहामा थे। 2000 से 2019 की अवधि के लिए प्यूर्टो रिको, म्यांमार और हैती सबसे ऊँचे स्थान पर है।

यह भी पढ़े:  गूगल 2 स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करना सीखे (Google 2 Step Verification)

जलवायु परिवर्तन क्या है?

सामान्यतः जलवायु का आशय किसी दिये गए क्षेत्र में लंबे समय तक औसत मौसम से होता है। अतः जब किसी क्षेत्र विशेष के औसत मौसम में परिवर्तन आता है तो उसे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) कहते हैं। जलवायु परिवर्तन को किसी एक स्थान विशेष में भी महसूस किया जा सकता है एवं संपूर्ण विश्व में भी।

जलवायु परिवर्तन के कारक

प्राकृतिक गतिविधियाँ यथा भूस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट, पृथ्वी का झुकाव, समुद्री तूफान, बाढ़, सूखा आदि से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा वनस्पति का विनाश होता है, जो कि जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है।

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम के एक सदस्य डेविड एकस्टीन के अनुसार,

“दि क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स यह दर्शाता है कि जलवायु के भीषण रूप के विनाशकारी प्रभाव पड़े हैं, खास कर गरीब देशों पर, लेकिन साथ ही जापान और जर्मनी जैसे औद्योगिक देशों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है, जो निरंतर बढ़ रहा है।”

यह भी पढ़े:  दुनिया की सबसे बड़ी गुफा; यहां झीलें, नदियां और जंगल भी, इसके बारे में जानकर हैरान रह जाएंगे आप

हैती, फिलीपींस और पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों पर बार-बार मौसम की भीषण मार पड़ रही है और इन देशों को संभलने का मौका तक नहीं मिल पा रहा। रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि अब गरीब देशों को भरोसेमंद वित्तीय सहायता मिलना बेहद जरूरी हो गई है। यह सहायता न केवल जलवायु परिवर्तन की मार झेलने के बाद पुनर्वास के लिये हो, बल्कि जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली हानि एवं क्षति की भी पूर्ति इससे की जा सके।

वर्ष 2018

में तेज गर्म हवाओं के कारण सबसे ज्यादा क्षति हुई। पिछले साल सबसे अधिक प्रभावित होने वाले 10 देशों में जर्मनी, जापान और भारत भी शामिल हैं, जहां अपने नियमित समयसीमा से अधिक समय तक गर्म हवाएं चलीं।

हाल ही के एक अध्‍ययन में यह साबित हो गया है कि गर्म हवाओं की पुनरावृत्ति और उनकी भीषणता से जलवायु परिवर्तन का सीधा संबंध है। यूरोप में, उदाहरण के लिये, गर्म हवाओं की अवधि 100 वर्ष पूर्व की तुलना में 100 गुनी है। साथ ही साथ, डाटा की कमी के कारण, अफ्रीका महाद्वीप पर गर्म हवाओं के प्रभाव को कम दर्शाया गया हो।

यह भी पढ़े:  दुनिया की सबसे बड़ी गुफा; यहां झीलें, नदियां और जंगल भी, इसके बारे में जानकर हैरान रह जाएंगे आप

पर्यावरण थिंक टैंक जर्मनवॉच क्या है ?

जर्मनवॉच ई.वी. (1991 में स्थापित), जिसे आमतौर पर जर्मनवाच कहा जाता है, जर्मनी के बॉन में स्थित एक गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी संगठन है। यह औद्योगिक उत्तर और अविकसित दक्षिण में देशों के बीच व्यापार, पर्यावरण और संबंधों पर सार्वजनिक नीति को प्रभावित करना चाहता है। संगठन स्थिति पत्र बनाने के लिए कई तरह के आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों से टकराता है, अक्सर अन्य गैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी में। विशेष क्षेत्रों में खाद्य और कृषि नीति, जलवायु परिवर्तन और कॉर्पोरेट जवाबदेही में व्यापार शामिल हैं।


jhabuacityonline.com अब WhatsApp चैनल पर भी उपलब्ध है। आज ही फॉलो करें और पाएं महत्वपूर्ण खबरें


Leave a Comment