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दुबई न्यूज़ : आपको जानकर शायद अजीब लगेगा लेकिन अब एक ऐसी इमारत बनने जा रही जो घूमेगी और साथ में बिजली भी बनाएगी। और ये इमारत दुबई में बनेगी, इस इमारत के चारो और सिलिकॉन प्लेट लगाई जाएगी जो सूर्य के प्रकाश से ऊष्मा लेकर बिजली बनाएगी।
इमारत का फ्लोर घूमेगा 360 डिग्री पर
यह ऐसी इमारत होगी जिसके सभी माले(फ्लोर) 360 डिग्री तक घूम सकेंगे। इस इमारत में बैठे लोग अपने आस-पास के सभी एंगल का लुत्फ़ उठा सकेंगे।
दुबई में इसकी शुरुआत साल 2008 में हो चुकी थी और अब 8 साल के इंतजार के बाद अब यह सपना पूरा होने के करीब है। इमारत के हर माले को 360 डिग्री घुमाने की योजना अब लगभग पूरी हो चुकी है और इसका 3डी प्रिंट वीडियो भी जारी कर दिया गया है। अब सिर्फ आपको इस बिल्डिंग को सजीव रूप से देखने के लिए 3 साल का इंतज़ार और करना होगा। साल 2020 में ये अनोखी बिल्डिंग बन कर तैयार हो जायेगी। 80 मंजिला इस इमारत की ऊंचाई 1375 फ़ीट है, जिसे इस तरह से डिजाइन दिया गया है कि इसका हर फ्लोर एक-दूसरे के विपरीत घूमेगा।
कीमत इतनी कि उड़ जाएंगे होश!
इस इमारत में फ्लोर की कीमतों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं लेकिन इसकी खूबियों और अजूबेपन के कारण कयास यही लगाए जा रहे हैं कि इसकी कीमत बुर्ज खलीफा से भी ज्यादा हो सकते हैं। बुर्ज खलीफा के एक फ्लोर की कीमत 90 लाख डॉलर है।
बता दें कि 2020 में बन कर तैयार होने वाली यह इमारत पूरी तरह से ऑटोमेटिक होगी। इमारत को बनाने वाले आर्किटेक्चर के मुताबिक़ यह बिल्डिंग पांच सितारा नहीं बल्कि सितारों से कहीं ज्यादा है, यहां रहने और रुकने वाले लोगों के लिए यह एक अलग एह्साह और अनुभव होगा।
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दुबई
दुबई में हिंदुओं के लिए बने एक मंदिर का शुभारंभ अगले साल दीवाली तक कर लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों में इसकी जानकारी दी गई है। बीते साल अगस्त में महामारी के दौरान इस मंदिर की नींव रखी गई थी। दुबई के सामुदायिक विकास प्राधिकरण के मुताबिक, शहर के जेबेल अली इलाके में गुरु नानक सिंह दरबार के समीप इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जो कि दुबई में सिंधी गुरु दरबार का विस्तार है।
सिंधी गुरु दरबार मंदिर यहां स्थित हिंदुओं के पुराने मंदिरों में से एक है, जिसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। रविवार को गल्फ न्यूज से बात करते हुए मंदिर के ट्रस्टियों में से एक राजू श्रॉफ ने कहा, ‘यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में लोगों के खुले विचारों और मानसिकता की पहचान है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘1950 के दशक में एक कमरे के एक पुराने मंदिर से 70,000 स्क्वॉयर फुट के मंदिर और कम्युनिटी सेंटर में तब्दील होने का इसका यह सफर दुबई के शासकों की उदारता और खुले विचारों और सीडीए, दुबई के अभूतपूर्व समर्थन के बिना संभव नहीं हो पाता।’