हमारे आसपास कई जड़ी-बूटियां होती हैं, जो रोगों से लड़ने में मदद करती हैं। आज हम जानेंगे चिरायता (chirata) जड़ी-बूटी के बारे में। इसका स्वाद कड़वा होता है, लेकिन, यह जितना कड़वा है, रोगों से लड़ने में उतना ही ताकतवर होता है। इस लेख में दी गयी जानकारी मात्र आपको इसके लाभों से अवगत कराना है। सेवन से सम्बंधित जानकारी के लिए कृपया डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
चिरायता के बारे में जानते है
हमारे आयुर्वेद में चिरायता को एक खास औषधि के रूप में माना गया है। कई रोगों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। चिरायता बाजार में बाहत आसानी से मिल जाता है। इसकी जड़ से लेकर पत्ते तक सभी का औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। हमारे देश में चिरायता का उपयोग हेपेटाइटिस, सूजन, ब्लड शुगर कंट्रोल, बुखार-खांसी-जुकाम, दर्द में राहत, इम्यूनिटी, आंखों की रोशनी, भूख बढ़ाने और डाइजेशन के लिए किया जाता है।
इन बीमारियों के लिए चिरायता का इस्तेमाल कर सकते है:-
- ब्लड शुगर
- बुखार-खांसी-जुकाम
- इम्यूनिटी बढ़ाए
- एनीमिया
- लिवर
- डाइजेशन
- खून साफ करता है
- भूख बढ़ाए
- मलेरिया
- आंखों की रोशनी बढ़ाए
- पेट के कीड़े
- जोड़ों के दर्द
- स्किन केयर
- कैंसर
- हिचकी- उल्टी में फायदेमंद
चिरायता का इस्तेमाल
चिरायते के पौधा का जड़,तना और पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते है। जानते हैं चिरायता का सेवन करने के तरीके और मात्रा के बारे में-
- दिन में दो बार खाना खाने से पहले 60ml चिरायते के अर्क का सेवन टॉनिक के रूप में किया जा सकता है। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है।
- चिरायता के पत्तों का जूस निकालकर पी सकते हैं। यह कड़वा होता है, इसलिए इसमें शहद मिलाया जा सकता है।
चिरायता के नुकसान
- ब्लड प्रेशर की दवाई लेने वालों को चिरायता का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह ब्लड शुगर के लेवल को कम कर सकता है।
- गैस्ट्रिक और आंत के अल्सर की समस्या वालों को चिरायता का सेवन से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर- चिरायता का इस्तेमाल कर रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।