भगोरिया मेला 2026, मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल का सबसे रंगीन और ऐतिहासिक उत्सव, इस बार 24 फरवरी 2026 से शुरू हो रहा है। झाबुआ प्रशासन ने घोषणा की है कि इस वर्ष भगोरिया में डीजे पर प्रतिबंध रहेगा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ ही उत्सव मनाया जाएगा। यह निर्णय आदिवासी संस्कृति और परंपरा संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है।
अगर आप भगोरिया मेला झाबुआ 2026 की तारीख, इसकी इतिहास, परंपरा, स्थान और खासियत के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह विस्तृत ब्लॉग आपके लिए है।
🔎 भगोरिया मेला क्या है?
भगोरिया मेला भील और भिलाला आदिवासी समुदाय का प्रमुख त्योहार है, जो होली से पहले मनाया जाता है। यह केवल एक मेला नहीं बल्कि आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव है, जहां परंपरागत नृत्य, संगीत, हाट-बाजार और सामाजिक मेलजोल का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
मुख्य आकर्षण:
- पारंपरिक मांदल और ढोल की थाप
- रंग-बिरंगे आदिवासी परिधान
- पारंपरिक हाट-बाजार
- युवाओं की सामाजिक सहभागिता
- लोकनृत्य और लोकगीत
📅 भगोरिया मेला 2026 की तारीख (Jhabua Alirajpur Bhagoria Mela Date 2026)
Bhagoria Date 24 फरवरी 2026 से 2 मार्च 2026 तक झाबुआ अलीराजपुर में अलग-अलग स्थानों पर भगोरिया हाट आयोजित होंगे।
| तारीख | दिन | कार्यक्रम स्थल |
|---|---|---|
| 24 फरवरी 2026 | मंगलवार | पिटोल, खरडू बड़ी, थांदला, तारखेड़ी, बरवेट, बखतगढ़, आबुआ, अंधारवाड़ |
| 25 फरवरी 2026 | बुधवार | उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोडायता, कल्याणपुरा, मदरानी, ढेकल, बरझर, खट्टाली, चांदपुर, बोरी |
| 26 फरवरी 2026 | गुरुवार | पारा, हरिनगर, सारंगी, समोई, चैनपुरा, फुलमाल, सोंडवा, जोबट |
| 27 फरवरी 2026 | शुक्रवार | बेकलदा, मांडली, भगौर, वालपुर, कट्टीवाड़ा, उदयगढ़ |
| 28 फरवरी 2026 | शनिवार | राणापुर, मेघनगर, बामनिया, झकनावदा, बलेडी, नानपुर, उमराली |
| 1 मार्च 2026 | रविवार | झाबुआ, ढोलियावाड़, रायपुरिया, काकनवानी, कनवाड़ा, छकतला, कुलवट, सोरवा, आमखूंट, झिरन |
| 2 मार्च 2026 | सोमवार | आलीराजपुर, भाबरा, पेटलावद, बड़ा गुड़ा, रंभापुर, मोहनकोट, कुंदनपुर, रजला |
⚠️ ध्यान दें: अलग-अलग गांवों में भगोरिया हाट की तिथियां भिन्न हो सकती हैं।
🚫 भगोरिया में डीजे प्रतिबंध 2026
इस वर्ष प्रशासन ने भगोरिया मेला में डीजे पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
प्रतिबंध के कारण:
- पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण
- ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण
- सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना
- स्थानीय वाद्य यंत्रों को बढ़ावा
अब मेले में केवल ढोल-मांदल, थाली और पारंपरिक वाद्य ही बजेंगे। इससे आदिवासी लोक संस्कृति की असली झलक देखने को मिलेगी।
🪘 40 साल से ढोल-मांदल बना रहे कारीगर
झाबुआ जिले के एक गांव में 40 वर्षों से एक कारीगर पारंपरिक ढोल और मांदल बना रहे हैं।
- 25 दिन में एक मांदल तैयार होता है
- कीमत लगभग ₹20,000 से ₹25,000
- पूरी तरह हाथ से तैयार किया जाता है
यह कारीगरी भगोरिया उत्सव की आत्मा मानी जाती है।
🌈 भगोरिया मेले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इतिहासकारों के अनुसार, “भगोरिया” शब्द ‘भगोर’ नामक स्थान से जुड़ा माना जाता है। समय के साथ यह उत्सव झाबुआ, अलीराजपुर और धार जिले में लोकप्रिय हो गया।

यह त्योहार होली से पहले आयोजित होता है और इसे आदिवासी होली उत्सव भी कहा जाता है।
📍 भगोरिया मेला कहाँ लगता है?
मध्यप्रदेश के पश्चिमी अंचल में यह मेला खासतौर पर इन जिलों में आयोजित होता है:
- झाबुआ
- अलीराजपुर
- धार
- थांदला
- पेटलावद
यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
🎭 भगोरिया मेले की खास बातें
✔ पारंपरिक लोकनृत्य
✔ रंगीन पगड़ियां और चांदी के गहने
✔ महुआ और स्थानीय व्यंजन
✔ पारंपरिक हथकरघा वस्त्र
✔ आदिवासी हस्तशिल्प बाजार
🧳 कैसे पहुंचे भगोरिया मेला झाबुआ?
सड़क मार्ग:
इंदौर, रतलाम और धार से झाबुआ के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है।
रेल मार्ग:
निकटतम रेलवे स्टेशन – मेघनगर, रतलाम
हवाई मार्ग:
निकटतम एयरपोर्ट – इंदौर (देवी अहिल्या बाई होलकर एयरपोर्ट)
🏨 ठहरने की सुविधा
- स्थानीय होटल
- धर्मशालाएं
- गेस्ट हाउस
- होमस्टे विकल्प
सुझाव: मेले के समय पहले से बुकिंग करा लें।
📸 पर्यटन और फोटोग्राफी के लिए स्वर्ग
यदि आप कल्चर फोटोग्राफी, ट्राइबल लाइफस्टाइल या लोक संस्कृति में रुचि रखते हैं, तो भगोरिया मेला आपके लिए बेहतरीन अवसर है।
❓ FAQs – भगोरिया मेला 2026
1. भगोरिया मेला कब है?
24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 2 मार्च 2026 तक।
2. क्या भगोरिया में डीजे चलेगा?
नहीं, 2026 में डीजे पर प्रतिबंध रहेगा।
3. भगोरिया किस राज्य में लगता है?
मध्यप्रदेश।
4. भगोरिया किस समुदाय का त्योहार है?
भील और भिलाला आदिवासी समुदाय।
🔔 निष्कर्ष
भगोरिया मेला 2026 झाबुआ केवल एक मेला नहीं बल्कि आदिवासी संस्कृति का जीवंत उत्सव है। इस वर्ष डीजे प्रतिबंध के कारण पारंपरिक ढोल-मांदल की गूंज फिर से मेले की पहचान बनेगी।
यदि आप भारतीय लोक परंपराओं को करीब से देखना चाहते हैं, तो इस वर्ष का भगोरिया हाट 2026 मिस न करें।