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Mallakhamb: मलखंब क्या है? मलखंब का इतिहास ,उत्पति,लाभ और प्रकार

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हेलो आपका स्वागत है आज आपको हम मलखंब खेल (Mallakhamb Game) के बारे में बताने जा रहे है। मलखंब का अर्थ जिम्नास्ट पोल होता है। मलखंब एक इसा खेल है जो पूरे शरीर को व्ययाम ओर कसरत करा कर स्वस्थ रखता है। आपको यह बात बता दे कि ये हमको दिखने में जितना आसान दिखता है पर वास्तव में ये उतना आसान नही होता है। क्योंकि इसके लिए आपकी मांशपेशियों में ताकत होने चाहिए इसको सीखने के लिए बहुत मेहनत लगती है। 

image source: olympics.com

Mallakhamb information: तो अब आपको अगर मलखंब को सरल भाषा मे जानना होतो आप यह से जान सकते है की मलखंब एक ऐसा खेल है जिसमे एक सीधा खम्बा होता है जिस पर चढ़ कर योग के साथ जिम्नास्ट भी किया जाता है । इसके अलावा मलखंब भारत के पुराने खेलो मेसे एक है क्योंकि इसके द्वारा ही भारत के जो वीर या योद्धा होते थे वे इस पर ट्रेनिंग करते थे । मलखंब के खंभे को शीशम ओर सगबान की लकड़ी से बनाया जाता है जिसके ऊपर तेल लगाया जाता है जिसके बाद इसको।जमीन में गाड़ दिया जाता है ।और फिर उस पर कलाकृतियां की जाती है। 

मलखंब क्या है? (What is Mallakhamb)

मलखंब का अर्थ – पहले के समय मल का मतलब कुश्ती ओर खम्ब का मतलब खम्बा या खुटा भी कहा जाता था जिसका अर्थ होता है खंबे पर की जाने वाली कुश्ती इसके अलावा यह एक मार्शल आर्ट में नई नई तकनीक को सीखने और उसमें महारत हासिल करने के लिए पहले के योद्धा ओर वीर इस पर प्रैक्टिस या सीखते थे। 

मलखान में कितने खिलाड़ी होते हैं?

मलखंब में खिलाड़ियों की संख्या निर्धारित नहीं होती है।

इतिहास मलखंब ( History of Mallakhamb

मल्लखांब इतिहास: मलखंब का इतिहास बहुत ही ज्यादा पुराना है और इसका पूरा सच किसी को नही पता है कि आखिर यह प्राचीन भारत मे कब से है मलखंब को भारत के सबसे पहले खेलो मेसे एक माना जाता है। मलखंब का यू तो भारत के प्राचीन लेखों में लिख मिलता है जैसे कि बहुत सारे काव्यो मेंपर मलखंब का सबसे पहले लेख या जानकारी 12वी शताब्दी में राजा सोमेश्वर के पाठ मानसोलस मिलता है। 

Mallakhamb origin – जिसके बाद जैसे जैसे समय बिता ओर साल 1600-1700 से 1800 तक यह खेल या कला लुप्त सी हो गयी थी । कोई ज्यादा इसमें रुचि नही दिखाता था पर उसके कुछ समय बाद ये कला वापस से अस्तित्व में आई और बहुत से राजा जैसे कि बाजीराव,बलभट्ट ने अपनी राज्य की रक्षा के लिए सेनिको को सीखना चालू कर किया । 

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जिसके बाद आया मराठा साम्राज्य जिसने मलखंब को बहुत ज्यादा प्रशिद्ध कर दिया खास कर के भारत के महाराष्ट्र में जहा पर रानी लक्ष्मी बाई नाना साहब ओर बहुत से वीर योद्धा ने इसका प्रयास किया और अपनी कुशलता को बढ़ाया क्योंकि मलखंब शरीर को स्वस्थ रखने में ओर उसको ताकतवर बनाने मदद करता है । 

जिसके बाद साल 1936 में मलखंब को बर्लिन में प्रदशित किया गया था जिसको करने वाले भारत के महाराष्ट्र के रहने वालों ने किया था। जो वह पर अपनी लकप्रियता को ओर आगे बढ़ावा मिला जिसके बाद भारत मे होने वाली राष्ट्रीय जिम्नास्टिक चैंपियनशिप 1958 में दिल्लीमें इसको राष्ट्रीय स्तर में आयोजित किया गया जो कि बहुत लोकप्रिय हुआ बाद में यह भारत के मध्य प्रदेश ग्वालियर में सबसे पहला राष्ट्रीय मलखंब चैंपियनशिप आयोजित की गई। 

मध्यप्रदेश का राज्य खेल

Mallakhamb originated in which state? 10 अप्रैल 2013 को भारत के मध्यप्रदेश राज्य ने मलखंब को राजकीय खेल घोषित किया। तब से प्रतिवर्ष 10 अप्रेल को मलखंब उत्स्व मनाया जाता है। इसके बाद यह बहुत से खेल प्रतियोगिता में भाग मिला जो कि बहुत बड़ी बड़ी थी जैसे कि ऑस्ट्रेलिया में गोल्फ कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम में ओर आज यह भारत मे खेलो इंडिया युथ गेम्स में भी शामिल है। तो अब हम जान लेते है कि मलखंब से हमे क्या लाभ मिलते है। 

मलखंब के प्रमुख लाभ कौन से है? 

Mallakhamb के बहुत से फायदे है तो चलाये आपको एक एक कर के इसके फायदों के बारे में बताते है कि ताकि आपको भी इसका एक अच्छा ज्ञान प्राप्त हो सके मलखंब का मतलब हम समझते है कि यह बस हमको स्वस्थ रखता है पर इसके साथ साथ हमे ओर भी बहुत खुसब मलखंब से प्राप्त कर सकते है जैसे- 

मलखंब से शरीर स्वस्थ रहता है

 मलखंब को जब हम करते है तो हमारे शरीर मे फुर्ती बहुत ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि मलखंब के द्वारा हमारा शरीर हल्का होता जाता है । जिसके बाद हमारे शरीर।की जो मांशपेशिया होती है जो।ओर ज्यादा मजबूत होती जाती है ।क्योंकि मलखंब करने पर हमारे पूरे शरीर की एक्सरसाइज होती है । 

Mallakhamb करने से शरीर मे फुर्ती ओर तंदुरुस्ती का बढ़ना

मलखंब एक इसा खेल है जिसने पूरे शरीर की एक्सरसाइज होती क्योंकि खम्बे पे कलाबाजी करना कोई छोटी बात नही है इसके लिए बहुत ज्यादा फुर्तीला होना पड़ता है और शरीर को हल्का करना पड़ता है। जिस कारण हमारा शरीर मजबूत होते जाता है। 

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मलखंब से शरीर मे ताकत बढ़ाना

 हम मलखंब अच्छे समय तक सीखते है और इसका प्रयास करते रहते है तो हमारे शरीर मे ताकत बढ़ने लगती है और हमारा शरीर मजबूत होते जाता है क्योंकि मलखंब के खम्बे पर व्ययाम करना कुछ छोटी चीज नही है उसमें हमारे शरीर की पूरी ताकत और फुर्ती का परिणाम देना पड़ता है।जिस कारण हमारे शरीर मे रोज प्रैक्टिस के कारण ताकत का निर्माण होता है । 

मलखंब से शरीर में रोग का कम होना

मलखंब के कारण बहुत से हमारा शरीर खुल जाता है इस से हमारे शरीर की बहुत से रोग होते जिसको कम करने में यह बहुत लाभदायक होता है जैसे कि इस से ह्रदय के रोग या रक्त रोग इन सब मे हमको लाभ ओर राहत मिलती है । इसके अलावा मांशपेशियों के रोग और शरीर के अन्य रोग से मलखंब करने से आसाम मिलता है। 

योग और जिम्नास्ट

हम मलखंब को जिम्नास्ट की तरह समझते है पर वह हम मलखंब को एक तरह से जिम्नास्ट ओर योग का मिलान भी कह सकते है क्योंकि यह खम्बे पर किया जाने वाला योगा ही होता है। जिसको हम रसि या खम्बे पर करते है । 

अब हम बात करने जा रहे है कि मलखंब के कितने प्रकार होते है क्योंकि ज्यादातर हम खाली मलखंब को लकड़ी के खम्बे में करते देखते है पर मलखंब के ओर भी प्रकार होते है ।जिसको अब हम जानेंगे कि आखिर कितने प्रकार होते है । 

मलखंब के कितने प्रकार होते है? (types of mallakhamb)

मल्लखम्भ का प्रकार: आप सब को ये तो अब पता चल गया होगा कि मलखंब क्या है पर आपको ये नही पता चला होगा कि मलखंब कितने प्रकार का होता है तो आप आज हम उसके बारे में भी जानेंगे तो चलिए यू तो मलखंब मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैजिसमे सबसे पहले पोल मलखंबहोता है जो सबसे पहला मलखंब का प्रकार माना जाता है जिसके बाद आते हेंगिंग मलखंबओर रस्सी मलखंबहै । तो चलिए अब विस्तार से इसके बारे में जानते है। 

पोल मलखंब (pole mallakhamb) 

Source: DD News on Twitter

यह एक शीशम के लकड़े को खम्बे के आकार का बना कर जमीन में लगाया जाता है फिर उस पर अरण्डी का तेल लगाकर उसके घर्षण को कम किया जाता है । जिसके बाद उस पर पर अपनी कला को दिखाया जाता है उस पर जिम्नास्ट ओर हवाई योग किया जाता है । जो बहुत ही शानदार होता है और इसमे बहुत ताकत लगती है अब इसके नृत्य और योग में इसको क्षेत्र भी आगे बढ़ता जा रहा है। 

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हेंगिंग मलखंब (hanging mallakhamb)

Source: Wikimedia Commons

यह एक तरह से पोल मलखंब की तरह ही होता है पर इसमें लकड़ी का खम्बे छोटा होता है और उसको लोहे की कड़ी से लटकाया जाता है । और फिर उस पर हेंगिंग मलखंब किया जाता है । यह पोल मलखंब से थोड़ा सरल होता है पर उसको करने में भी बहुत ज्यादा मेहनत लगती है इसमें जो महारत हासिल कर लेता है वो बहुत अलग अलग तरीके से अपनी कला यह पर दिखा सकता है । इसके बाद आता है रस्सी मलखंब तो चलिए इसके बारे में जानते है। 

रस्सी मलखंब (rope mallakhamb)

Source: Edexlive

यह तो आप रस्सी से ही समझ गए है कि यह रस्सी पर किये जाने वाला मलखंब है जिसमे रस्सी को प्रयोग कर के उस पर लटक ते है और कलाकृतियों का प्रदशर्न करते है और यह आज के समय मे बहुत ज्यादा लोकप्रिय बनता जा रहा है और इस तरह के मलखंब को डांस क्रियाओ में भी बहुत ज्यादा यूज़ किया जाता है। 

मलखंब के नियम क्या है? (rules of mallakhamb)

मलखंब के नियम न ज्यादा कठिन होते है और न ज्यादा सरल ये आप ये बस आप इसे समझ सकते है । एक खम्बा या रस्सी होती है जिस पर आप लटक कर अपनी कला का प्रदर्शन या योगा जिम्नास्ट कर सकते है । ये थोड़ा थोड़ा जिम्नास्ट के नियमों की तरह होता है । जिसके आधार पर इसके  हम मलखंब कर सकते है। 

मलखंब के बारे में कुछ जानकारी आपके लिए जैसे कि मलखंब मध्य प्रदेश का राजकीय खेल है । और यह केंद्र सरकार से प्राप्त मान्यता के अनुसार भारत का एक प्राचीन खेल है । जिसका लेख 12वी ईसवी के लेखों में मिलती है । जिसके बाद आज मलखंब भारत के पहले खेलो मेसे एक है भारत के लिए ये बहुत ही गर्व का कारण है जो आज इतना गौरवशाली खेल भारत मे ही है।उमीद है आपको मलखंब की ये जानकारी पसंद आये होगी । 


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